क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि,जानिए इसका महत्व सिर्फ कलमतक पर

महादेव को जगत के दाता और मोक्ष प्रदाता कहा जाता है। उनकी कृपा से मानव इहलोक में सभी सुखों को भोगकर देह अवसान के बाद मोक्ष को प्राप्त करता हैं। महादेव कैलाशवासी है, औघड़दानी है और देन, दानव, यक्ष, किन्नर, प्रेत आदि सभी के देव माने जाते हैं। पत्तों और फूलों से वो शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं। कुछ तिथियां महादेव को समर्पित है, इसलिए सालभर की उपासना का फल इन दिनों में मिल जाता है। महादेव की एक ऐसी ही प्रिय तिथि महाशिवरात्रि है।

महाशिवरात्रि को हुआ था शिव विवाह-

शास्त्रोक्त मान्यता है कि महाशिवरात्रि तिथि को भगवान शिव का देवी पार्वती के साथ विवाह संपन्न हुआ था। दोनों का विवाह महाशिवरात्रि पर प्रदोष काल में हुआ था। सूर्यास्त के बाद 2 घंटे और 24 मिनट की अवधि प्रदोष काल कहलाती है। मान्यता है कि इस समय भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होकर नृत्य करते हैं। इसलिए महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रदोष काल में महादेव का पूजन करना विशेष फलदायी होता है। ईशान संहिता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन देवादिदेव महादेव ज्योतिर्लिंग के रूप में धरती पर प्रगट हुए थे। इसलिए इस दिन शिवालयों खासकर बारह ज्योतिर्लिंगों पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है।

बारह ज्योतिर्लिंग का इस दिन हुआ था प्राकट्य-

बारह ज्योतिर्लिंगों में सौराष्ट्र में सोमनाथ, श्रीशैलम में मल्लिकार्जुन, उज्जैन में महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर नगर में ओंकारेश्वर महादेव, परली में बैजनाथ, उत्तराखंड में केदारनाथ, डाकिनी महाराष्ट्र में भीमाशंकर , काशी में विश्वनाथ, नासिक में त्रयंबकेश्वर, बड़ौदा में नागेश्वर, तमिलनाडु में रामेश्वरम, महाराष्ट्र में बेरुलमठ के पास घृष्मेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान है।
महाशिवरात्रि के दिन शिव का जलाभिषेक करने और उनका विधि-विधान से पूजन करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस दिन व्रत रखने और शिव पूजा करने से शिव वरदान की प्राप्ति होती है।
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