छेड़छाड़ या ब्लात्कार ही नहीं, गलत मंशा रखना भी उत्पीड़न है

कार्यस्थल पर महिलाओं की यौन उत्पीड़न से सुरक्षा विषय पर प्रशिक्षण संपन्न


महिला की सहभागिता का दायरा सिर्फ बच्चे पैदा करने तक सीमित नहीं होना चाहिये। हर निर्णय में उनकी सहभागिता होगी,तभी सामाजिक विकास को गति मिलेगी। देश की आधी लगभग आबादी महिलाओं की है,अगर वह घर से बाहर निकलकर कुछ रोजगार-स्वरोजगार करेगी तो निश्चय ही समाज आर्थिक रूप से समृद्ध होगा। लेकिन उसके लिये हमें महिलाओं को अनुकूल- सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना होगा। यह बात महिला एवं बाल विकास विभाग के संभागीय संयुक्त संचालक सुरेश तोमर ने कही।

कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जिलास्तरीय कार्यालयों में गठित आंतरिक परिवाद समिति सदस्यों को संबोधित करते हुए तोमर ने कहा कि महिलाओं का सार्वजनिक क्षेत्रों में आना देश की तरक्की का आधार है। जितनी ज्यादा महिलाएं रोजगार से जुड़ेंगी उतनी ही देश में आर्थिक समृद्धि आती जाएगी। महिलाओं की सहभागिता सिर्फ बच्चे पैदा करने तक ही न हो,उनकी सहभागिता का दायरा बढ़ना चाहिये।

कार्यस्थल का दूषित-उपेक्षित शोषित व्यवहार महिला कर्मचारियों की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। कार्यस्थल पर महिलाओं के अनुकूल माहौल बनाए रखने के लिये कानून बनाया गया है। महिला के साथ अपराध होना सिर्फ उस महिला तक ही सीमित नहीं होता,बल्कि उसका दर्द पूरे समाज को झेलना पड़ता है।

मास्टर ट्रेनर भावना त्रिपाठी ने कहा कि कार्यस्थलों के दूषित माहौल को महिलाओं के अनुकूल बनाने के लिये यह कानून बनाया गया। कार्यस्थल पर बलात्कार या छेड़छाड़ जैसी घटना होना ही नहीं,बल्कि गलत मंशा रखना भी उत्पीड़न है। कार्यस्थल पर महिला के साथ होने वाला दुर्व्यवहार उस महिला के संपूर्ण जीवन को प्रभावित करता है। महिलाओं को असहज महसूस होने वाली हर हरकत को कानून में यौन उत्पीड़न के दायरे में रखा गया है।

- गलत व्यवहार का विरोध करें

 अगर कार्यस्थल का कोई सहकर्मी या वरिष्ठ अधिकारी किसी काम के एवज में कोई ऐसी मांग करता है, जो मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली हो या असहज लगे तो उसका विरोध करो। कार्यालय में गठित आंतरिक परिवाद समिति को लिखित शिकायत करो। इस समिति को कानून में सिविल न्यायालय की शक्तियां दी गईं है। हर शासकीय एवं अशासकीय कार्यालय में यह समिति गठित होना अनिवार्य है। समिति गठित न होने पर कार्यालय प्रमुख पर 50 हजार रुपये के प्रावधान है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र सुंदरियाल ने बताया कि महिलाओं के अनुकूल वातावरण निर्माण के लिए सभी जिला स्तरीय एवं विकासखंड स्तरीय कार्यालयों में समितियों का गठन कराकर समिति सदस्यों को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। जिन कार्यालयों में आंतरिक परिवाद समिति गठित नहीं है,उन कार्यालयों की महिलाएं जिला स्तरीय स्थानीय परिवाद समिति को शिकायत कर सकतीं है।

 प्रशिक्षण कार्यशाला में जिला विधिक सहायता अधिकारी शिखा शर्मा,आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रशिक्षण केंद्र के निर्देशक पवन तिवारी, परियोजना अधिकारी पूजा स्वर्णकार, बाल संरक्षण अधिकारी राघवेन्द्र शर्मा,सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र दांगी एवं जीतेश जैन आदि उपस्थित थे।
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