सच कड़वा ही होता हैं,अभी तक नहीं हुई नगर सेठ पर भीड़ जुटाने को लेकर एफआईआर

क्या रसूखदार और राजनीति में हस्तक्षेप होने के कारण नहीं किया गया मामला दर्ज

क्या गरीब और आम जनता के लिए ही है सरकारी डण्डा
शिवपुरी।देश में अगर कोई कानून है तो वह सभी के लिए होता है कानून में कहीं भी नहीं लिखा है कि किसी धनवान या राजनीति में दखल रखने वाले को बक्श दिया जाये किन्तु शिवपुरी में ऐसा ही हुआ है कि एक पूर्व काँग्रेसी और धन्ना सेठ पर प्रशासन इस कोरोना काल में भीड़ जुटाकर सैकड़ो लोगों के जीवन दाव पर लगाने को लेकर आज तक कोई मामला दर्ज नहीं कर पाया है।

क्या है मामला

2 मई को पूर्व काँग्रेसी और नवीन भाजपाई राकेश गुप्ता द्वारा अपने होटल पर पिता की पुण्यतिथि पर गरीब और जरूरतमंदों के लिए निःशुल्क मास्क व खिचड़ी वितरण का कार्यक्रम रखा था जिसमें भीड़ भी लगी और कई पुराने व नए भाजपाई भी एकत्रित हुये इन नेताओ और आयोजक द्वारा इस भयानक कोरोना काल में WHO की गाइडलाइन के अनुसार सोशल डिस्टसिंग का पालन नहीं किया गया,वैसे भी इस महामारी के दौर में सरकारी निर्देशों के अनुसार कोई भी ऐसा आयोजन नहीं किया जा सकता जिसमें भीड़ एकत्रित हो,अगर कोई ऐसा करता है उसके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जायेगी।

क्या गरीब और आम जनता के लिए ही है सरकारी डण्डा

अगर यही कार्यक्रम इस महामारी में कोई ग़रीब और आम जनता द्वारा किया गया होता तो उस पर सरकारी मशीनरी धारा 188 के तहत मामला अवश्य ही दर्ज कर चुकी होती या कोई गरीब इस कोरोना काल में अपने भूखे बच्चों के लिए रोटी कमाने के लिए फल या सब्जी का ठेला लेकर सड़क पर निकला होता तो सरकारी और ख़ाकी वालों का डंडा उसका पिछवाड़ा जरूर लाल कर चुका होता और वह गरीब बिना कुछ विरोध किया चलता बनता क्योंकि वह ग़रीब है इस सबका विरोध करने की उसकी ओकात जो नहीं है।

क्या कर पायेंगे मामला दर्ज......?

अब देखना यह होगा कि सरकारी लोग इस कार्यक्रम को लेकर आयोजनकर्ता और शामिल हुए नेताओ जिन्होंने सोशल डिस्टसिंग का पालन नहीं किया उन पर मामला दर्ज कर पाते है या नहीं अगर मामला दर्ज नहीं होगा तो इससे साफ़ ज़ाहिर होगा कि कानून केवल ग़रीब और आम जनता के लिए ही होता है किसी धनवान और राजनीति में हस्तक्षेप रखने वालो के लिए नहीं होता है। 
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