जानिए अक्षय तृतीया पर घर में क्या लाने से बरसती है लक्ष्मी जी की कृपा


हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया पर्व का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यता है कि अक्षय तृतीया का दिन काफी शुभ होता है और किसी भी नए कार्य की शुरुआत इस दिन की जा सकती है और इसके लिए किसी विशेष मुहूर्त की जरूरत नहीं होती है। हिंदू पंचांग के मुताबिक अक्षय तृतीया पर्व इस साल शनिवार 22 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाया जाएगा। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को हर साल अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाता है।

सोना खरीदने की परंपरा

पौराणिक मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने की परंपरा है। इस दिन सोना खरीदना काफी शुभ होता है। लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और आप सोना नहीं खरीद सकते हैं तो ऐसी परिस्थिति में सोने के विकल्प के रूप में भी कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्हें खरीद सकते हैं। जिससे मां लक्ष्मी की कृपा घर और परिवार पर बनी रहेगी। पौराणिक मान्यता है कि मां लक्ष्मी को सोना बेहद प्रिय है इसलिए इस दिन लोग सोना और उसके आभूषण, आदि खरीदते हैं।

सोने के स्थान पर खरीदें ये चीजें

श्री यंत्र

अक्षय तृतीया पर्व पर सोने के स्थान पर श्रीयंत्र भी खरीदा जा सकता है। अक्षय तृतीया के दिन श्री यंत्र खरीद कर घर लाना बेहद शुभ माना जाता है। पूरे विधान से घर में श्री यंत्र की स्थापना करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है।

पीली कौड़ी

ज्योतिष और वास्तु में पीली कौड़ी को घर में रखना शुभ माना गया है। पीली कौड़ी माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को बेहद पसंद है। अक्षय तृतीया पर पीली कौड़ी खरीद माता लक्ष्मी के चरणों में रखना शुभ होता है। फिर अगले दिन लाल कपड़े में लपेटकर अलमारी में रखने से आर्थि लाभ होता है।


शंख

शंख को भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन शंख घर में लाने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

जौ

अक्षय तृतीया के दिन जौ खरीद सकते हैं। सवा किलो जौ खरीद कर घर के भंडारगृह में रखने से घर में मां अन्नपूर्णा की भी कृपा बनी रहती है। घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'

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