धरती मां को बचाने से ही मानव का अस्तित्व संभव,अन्नदाता बनेगा अब उर्जा दाता- विजयवर्गीय

ग्वालियर।पर्यावरण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना बहुत ही महत्वपूर्ण है।
सस्टनेबिलिटी हमारे समाज के लिए पर्यावरण पर कम से कम प्रभाव के साथ मौजूदा गति से आर्थिक विकास की जरूरतों को पूरा करने का एक दीर्घकालिक लक्ष्य है। लेकिन यह प्राकृतिक दुनिया और इसकी नाजुक पारिस्थितिकी को संरक्षित करने से कहीं अधिक है। यह व्यवसायों और सरकारी संस्थाओं की वृद्धि और विकास को सक्षम करने के बारे में है ताकि समाज के सभी हिस्से यह सुनिश्चित करने के लिए सद्भाव से काम करें कि आने वाली पीढ़ियों के पास जीवित रहने के लिए आवश्यक प्राकृतिक संसाधन हों।
मीरा क्लीनफ्यूल्स लि द्वारा ग्वालियर में आयोजित सस्टनेबिलिटी सेमिनार में बोलते हुए विख्यात पर्यावरणविद एन जी विजयवर्गीय ने कही ।
हमारे ग्रह और पानी और हवा जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सस्टनेबिलिटी महत्वपूर्ण है। एक स्थायी भविष्य का निर्माण और जीवन जीने के स्थायी तरीके अपनाने से प्रदूषण कम होगा और पौधों और जानवरों के आवासों की रक्षा होगी।
भारतवर्ष का किसान परंपरागत खेती और मानसून पर निर्भर रहकर दयनीय स्थिति में पहुंच गया है परंतु अब यह स्थित बहुत ज्यादा दिन रहने वाली नहीं है भारत का किसान अपने खेतों में ऊर्जा की खेती करने वाला है
एम सी एल कंपनी के सीनियर बीडीए एवं  गिर्द तालुका ऑनर  आनंद चतुर्वेदी ने बताया कि भारतवर्ष की हर तहसील में बायोमास से सीएनजी और बाॅयो फर्टिलाइजर बनाने के प्लांट की स्थापना कर रहे हैं, इसके लिए कच्चा माल नेपियर या हाथी घास होता है जो गन्ना और बाजरे का संकर किस्म है इसे एक बार बो देने पर सात आठ साल तक लगातार फसल मिलती रहती है, इसको कम पानी की आवश्यकता होती है और यह पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है,इसकी प्रति वर्ष प्रति हेक्टेयर एक हजार टन तक फसल ली जा सकती है, इसे खरीदने की सुनिश्चितता है।
जब तक बायो सीएनजी प्लांट की स्थापना हो नैपियर घास से बायो कोल बनाने के संयंत्र की स्थापना कर रहे हैं
शिवपुरी के प्रोजेक्ट ऑनर रवीन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि इसके लिए फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी का गठन किया जायेगा जिसमें तहसील के सभी किसानों को सदस्य बनाया जाएगा इस प्रोड्यूसर कंपनी को सीधे प्रोजेक्ट की लाभप्रदता से जोड़ा जाएगा ।  
समारोह को  जयसिह नरवरिया मुरैना, कन्हैया लाल गुर्जर जौरा, रमाकांत महते लहार, चन्नू जादौन सबलगढ, स्वदेश श्रीवास्तव,  डा निर्मल सिंह लोधी झांसी,, रवीश सिंह नावली, श्रीमती  दीप्ति  सांघी समाज सेविका  सहित  बड़ी संख्या में किसानो ने व प्रतिनिधियों ने भाग लिया
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