महाकाल लोक में तेज आंधी से गिरी सप्तऋषियों की मूर्ति की जाँच कर रहा है लोकायुक्त संगठन,उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी नहीं दे रही निर्माण कार्यों के दस्तावेज
उज्जैन।उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के श्री महाकाल महालोक में हुए निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की तीन शिकायतों के बाद भी जांच के लिए उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी जांच एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं कर रही है। जांच करने पहुंची लोकायुक्त संगठन की टीम को स्मार्ट कंपनी के अधिकारियों ने निर्माण से जुड़े दस्तावेज देने व दिखाने से मना कर दिया इसके बाद लोकायुक्त संगठन की ओर से स्मार्ट सिटी के कार्यपालक निदेशक को नोटिस भेजकर फिर से निविदा समेत सभी दस्तावेज मांगे गए हैं। नहीं देने पर जब्त करने की चेतावनी दी गई है। यह भी पूछा गया है कि सप्त ऋषियों की मूर्तियां फाइबर रीइन्फोसर्ड प्लास्टिक (एफआरपी) की लगाने का निर्णय कब लिया गया था।
संगठन यह भी जांच कर रहा है कि मूर्तियों का निर्माण तय मापदंडों के अनुसार किया गया था या नहीं। महाकाल लोक के निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत सबसे पहले तराना (उज्जैन) सीट से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने अगस्त 2022 में की थी।इसके बाद दिसंबर 2022 में तराना के ही लक्षमण कुमार नामक व्यक्ति ने भी शिकायत की थी। 28 मई को आंधी में सप्त ऋषियों में से छह मूर्तियां गिरने के बाद लोकायुक्त संगठन ने मामले का स्वत: संज्ञान लेकर एक और शिकायत दर्ज की है।इसी शिकायत की जांच करने लोकायुक्त संगठन की तकनीकी टीम उज्जैन गई थी। टीम ने मूर्तियों के निर्माण के संबंध में निर्धारित शर्तों से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। इस आधार पर यह तय किया जाएगा कि निर्माण तय मापदंडों के अनुसार किया गया था या नहीं।दूसरा यह भी देखा जाएगा कि मापदंडों के निर्धारण में कोई ढि़लाई तो नहीं की गई थी मूर्तियां गिरने के बाद कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा है। उसने निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उधर, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र कह चुके हैं कि निर्माण में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है।
