20 लाख खर्च, जमीन भी बेची... फिर भी नहीं बच सकी मासूम, मेडिकल कॉलेज पर उठे सवाल

शिवपुरी। शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान बदरवास तहसील के बारौद गांव निवासी 8 वर्षीय अंशुल केवट की मौत हो गई। बच्ची लंबे समय से पैरालाइसिस और पीलिया जैसी बीमारियों से जूझ रही थी। मौत के बाद पिता कृष्णपाल केवट ने मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
कृष्णपाल केवट के अनुसार, बेटी का करीब एक महीने तक दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चला था। इलाज के दौरान उसकी हालत में सुधार हुआ था, लेकिन सांस लेने में परेशानी के कारण डॉक्टरों ने ट्रेकियोस्टॉमी कर गले में नली लगाई थी। बाद में उसे आगे के उपचार के लिए शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां पिछले करीब 20 दिनों से उसका इलाज चल रहा था।
परिजनों का आरोप है कि गुरुवार सुबह करीब 4 बजे नर्सिंग स्टाफ ने बिना डॉक्टर की मौजूदगी के ट्रेकियोस्टॉमी की सप्लाई बंद कर दी, जिससे बच्ची को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उनका कहना है कि मदद के लिए वार्ड से इमरजेंसी तक गुहार लगाने के बावजूद समय पर डॉक्टर या स्टाफ नहीं पहुंचा और सुबह करीब 7 बजे अंशुल की मौत हो गई।
पिता ने बताया कि बेटी के इलाज में 20 लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके थे और इसके लिए परिवार को अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी। उनका दावा है कि बच्ची की हालत में सुधार हो रहा था, लेकिन मेडिकल कॉलेज में हुई कथित लापरवाही के कारण उसकी जान चली गई।

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